बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज : 22 करोड़ की अनियमितताएं, 1414 पन्नों की रिपोर्ट, 32 ऑडिट पैरा, 3 माह में 1 रुपए की भी वसूली नहीं

 इंजीनियरिंग कॉलेज, बीकानेर की ऑडिट में करीब 22 करोड़ रुपए की अनियमितताएं उजागर हुई थी। इसमें 10 करोड़ 62 लाख रुपए की वसूली कॉलेज से करनी थी। इसके अलावा करीब 11 करोड़ 14 लाख रुपए की अनियमितताएं सामने आमने आईं। वित्त विभाग ने आक्षेपों का निस्तारण करने के लिए नवंबर 2019 में पत्र लिख प्रिंसिपल को दिशा निर्देश जारी किए थे। लेकिन अब तक एक रुपए की भी वसूली नहीं हो सकी। तकनीकी शिक्षा विभाग स्तर पर जांच में चल रही ढिलाई के कारण जिम्मेदार बच रहे हैं। इधर, स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग ने निदेशक को पत्र लिखकर मार्ग दर्शन मांगा है।


विशेष ऑडिट कराने के लिए लिखा था पत्र
बीकानेर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति डॉ. एचपी व्यास और संभागीय आयुक्त सुबीर कुमार ने वर्ष 2014 में बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज के वर्ष 2004-05 से लेकर 2015 तक के लेखों की विशेष ऑडिट कराने के लिए वित्त विभाग को पत्र लिखा था। उसके बाद जुलाई 2017 में कॉलेज की ऑडिट शुरू हुई, जो जून 2018 तक चली। 1414 पन्नों की ऑडिट रिपोर्ट बनी। 32 तरह के आक्षेप लगाए गए। 21 करोड़ 76 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ।


अनियमितताएं कैसी-कैसी


गबन, बैंक मिलान चैक ईश्यू पंजिकाओं में गड़बड़ी, अग्रिम राशि का दुरुपयोग, शैक्षणिक व अशैक्षणिक पदों पर भर्ती, यात्राएं, सेवा पुस्तिका संधारण, सह आचार्य के पदों पर एक करोड़ 24 लाख से अधिक का भुगतान, राजकीय वाहन का दुरुपयोग,1500 का चैक 7500 रुपए का बनाना, एक ही चैक से दो बार भुगतान, लाल पैन से चैक लिखकर भुगतान उठाना, बैंक मिलान में 30 लाख का हेरफेर, सूचना के अधिकार के नाम लाखों का भुगतान आदि।
 


वित्त विभाग काे नहीं भेजी अनुपालना रिपोर्ट  
ईसीबी की ऑडिट रिपोर्ट के जांच प्रतिवेदन पर नवंबर 2019 में स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग के अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन के बीच मीटिंग हुई थी। निदेशक राम किशोर रैगर ने जांच प्रतिवेदन की अनुपालना प्रशासनिक विभाग के माध्यम से भेजने के लिए प्रिंसिपल को दो माह का समय दिया था। इसकी सूचना उन्होंने विशिष्ट शासन सचिव वित्त, अंकेक्षण को भी पत्र लिखकर दी थी। विभाग के अतिरिक्त निदेशक प्रताप सिंह पूनिया ने बताया कि 32 तरह के ऑडिट आक्षेपों पर पालना रिपोर्ट अभी तक कॉलेज प्रशासन ने नहीं भेजी है। ऑडिट पैरों का सत्यापन तक नहीं कराया है। पहली अनुपालना रिपोर्ट में खामियां थीं। इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए निदेशालय से मार्ग दर्शन मांगा है।


दूसरी रिपोर्ट तैयार की जा रही


वित्त विभाग को प्रथम अनुपालना रिपोर्ट भेजी थी। उसमें रही कमियों को देखते हुए दूसरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिन पर आक्षेप हैं, उन्हें व्यक्तिगत नोटिस दिए गए हैं। प्रिंसिपल की रिकवरी का मुद्दा बीओजी में तय होगा। गेस्ट फेकल्टी को अधिक वेतन देने का मसला बीओजी में अप्रूव हो गया था।-मनोज कुड़ी, - रजिस्ट्रार, इंजीनियरिंग कॉलेज, बीकानेर
 


कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी


बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज में अनियमितताओं की जांच चल रही है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अाॅडिट पैरा काे लेकर वित्त विभाग से भी पत्र मिले हैं। कॉलेज प्रशासन से भी जवाब मांगे गए हैं।- शुचि शर्मा, प्रमुख शासन सचिव, तकनीकी शिक्षा विभाग


नियुक्ति को संदेहास्पद माना था


सूचना के अधिकार के तहत मैने 1414 पन्ने की ऑडिट रिपोर्ट ली थी, जिसमें करीब 22 करोड़ रुपए की अनियमितताएं हैं। हैरत की बात यह है कि वर्ष 2017 में महालेखाकार   ने भी ईसीबी और सीईटी की  ऑडिट कराई थी। उसकी रिपोर्ट के अनुसार एक रिट में दोनों ही कॉलेज के प्रिंसिपल को वादी व प्रतिवादी माना है।   तकनीकी शिक्षा विभाग ने इनकी नियुक्ति को भी संदेहास्पद माना था।- विजय शर्मा, आरटीआई एक्टिविस्ट


सरकार कार्रवाई करने से बच रही


ईसीबी की ऑडिट में भारी गड़बडिय़ां सामने आई हैं। सरकार जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने से बच रही है। विधानसभा में उठाने के लिए यह मुद्दा सरकार को भेजा गया है।-


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